जहरीला पानी - डॉ. सारस्वत मोहन ‘मनीषी’
जहरीला पानी
जीवन दीप
जलाना है।
तनिक नहीं घबराना
है।
बाधाएँ
कितनी ही आएँ
अविरल बढ़ते जाना
है ।
यह
शराब है नहीं,
किसी का ताजा गाढ़ा खून
सुनो !
जिसको
पढ़ मानवता रोती,
दर्दीला मजमून सुनो !
सपनों
की सीता सिर
धुनती, भाव द्रौपदी
लुटती है।
चूल्हा
चक्की चिल्लाते हैं
नहीं पेट को
चून सुनो !
जहरीला अभिशाप
है।
नहीं
पुण्य यह
पाप है।
गली - गली,
घर-घर से हमको
यह अभिशाप मिटाना है।
बाधाएँ
कितनी ही आएँ
अविरल बढ़ते जाना
है ।
आँगन
की खुशियाँ लूटी
हैं इस शराब
चाण्डाली ने ।
खून
पिया कितने कुनबों
का लाल रंग
की ‘काली’
ने।
बचपन
की क्रीड़ा को
कुचला खेल-खिलौने तोड़ दिये।
खुल
पतझड़ का साथ
दिया है,
इस अंगूरी प्याली
ने।
बचो भयंकर
भूत है।
बर्बादी का
दूत है।
लाल
परी के गहरे
घातक चंगुल में क्यों आना है ।
बाधाएँ
कितनी ही आएँ
अविरल बढ़ते जाना
है ।
इसको
पीकर देव-मनुज, दानव
जैसा बन जाता
है ।
खुद
ही रोज देखते
हो पागल कैसा
तन जाता है ।
सत्यासत्य
विवेक नष्ट हो, वहशीपन पैदा होता
।
अधिक कहूँ
क्या कुन्दन भी
खोटा पैसा बन
जाता है।
दिल में रहती
दया नहीं।
आँखों में
कुछ हया नहीं।
मुँह
को कुत्ते चाट
रहे हैं ऐसा
वह मस्ताना है।
बाधाएँ
कितनी ही आएँ
अविरल बढ़ते जाना
है ।
पत्नी
को माता कहता
है, माता
होती घरवाली ।
पल में दूल्हा
बन जाता, दुलहन
होती गन्दी नाली ।
विष को अमृत
मान पी रहा
कैसा है भोला
मानव।
घर को नरक
बना देती डायन
शराब की इक
प्याली।
नरक को
दूर हटाओ रे।
स्वर्ग धरा पर
लाओ रे।
एक बार यदि
छोड़ें तो फिर
मिट जाता पछताना
है ।
बाधाएँ
कितनी ही आएँ
अविरल बढ़ते जाना
है ।
कसम
तुम्हें भोले बचपन
की माँ की
मीठी ममता की।
महलों
के पड़ोस में
रोती झोपड़ियों की
समता की।
पत्नी
के नंगे शरीर
की, दूर भागती
रोटी की।
हड्डी के सूखे
पिंजर की घटती
जाती क्षमता की।
मेधा क्यों
भरमाई है ।
छोड़ो यह
हरजाई है ।
होठों
से लगकर
छलती है,
तू पागल दीवाना
है ।
बाधाएँ
कितनी ही आएँ
अविरल बढ़ते जाना
है ।
कसम
तुम्हें सूखी छाती
की, विधवा
माँ की लोरी
की।
उजड़
रहे सावन -सिन्दूर की
सद्य षोडशी गोरी
की ।
खून – पसीने
की फसलों की
मेहनतकश इन्सानों की ;
गिरवी
पड़े हुए खेतों
की प्रेमचंद के
होरी की ।
कसम तुम्हें
ईमान की ।
कसम तुम्हें
भगवान की।
तोड़ ‘मनीषी’ बोतल प्याली भू
को स्वर्ग बनाना
है ।
बाधाएँ कितनी
ही आएँ अविरल
बढ़ते जाना है ।
- डॉ. सारस्वत मोहन ‘मनीषी’
[ काव्य-संकलन 'आग के अक्षर' से ]

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